सोमवार, 25 अक्टूबर 2010

हिंदी सेक्सी कहानियाँ पार्ट--2

 मोना  जोशी ने प्रकाशित किया मस्तानी मस्तानी 


हिंदी सेक्सी कहानियाँ  पार्ट--2 गतान्क से आगे.................... इसी तरीके से काम करोगे तो ज़्यादा दिन नही टिकोगे !- मेडम गुस्से से बोली. आशु- मेडम सॉरी..वो दीपा मेडम को काफ़ी उठाया...पर वो उठ ही नही रही. मेडम- हा अमीर बाप की बिगड़ी हुई औलाद जो है..मैं ऑफीस जा रही हू...शाम तक घर साफ मिलना चाहिए. इतना कहकर मेडम बाहर निकल गयी. 11 बज चुके थे और पेट मे चूहो ने हंगामा कर रखा था. मैं सीधे किचन मे गया और खाने की चीज़ ढूँढने लगा. पूरे किचन के डब्बे खाली थे. ऐसे लग रहा था कि चाइ-कॉफी के अलावा यहा कभी कुछ नही बना. मैं बाहर ही निकलने वाला था की फ्रिड्ज पर नज़र गयी. फ्रिड्ज पूरा मालामाल था. मैने वाहा से 2 बर्गर उठाए और ओवेन मे डाल दिए. फिर गरमा-गरम बर्गर और चिल्ड जूस पीकर शांति मिली. फिर मैं सीधे अपने कमरे पर पहुचा. कमरा साफ करके अपना समान सेट किया. तभी गेट पर नॉक हुई. वॉचमन- और भाई सब ठीक-ठाक हो गया. आशु- हा यार. वॉचमन- अपना नाम तो बता दो यार. आशु- आशु. वॉचमन- मेरा नरेश है. पिछले 15 साल से यहा काम कर रहा हू. आशु- अच्छा..तुम्हारा बाकी परिवार कहा है? नरेश- सब गाव मे हैं. आशु- अच्छा नरेश भाई एक बात तो बताओ...ये मेडम के साब कहा है? नरेश- ....मुझसे ये नही पूछो तो अच्छा है. और कुछ भी पूछ लो. आशु- अच्छा कोई बात नही.. पर ये मेडम की उम्र तो 30 साल से ज़्यादा नही लगती...फिर ये 17-18 साल की बेटी कहा से पैदा हो गयी. नरेश- तुम सब पूछ कर ही मनोगे. दीपा मेडम दीपिका मेम की सौतेली बेटी है. दीपा मेडम के पापा ने दूसरी शादी की थी. आशु- ओह तो ये बात है. मैं दीपा मेडम को उठाने गया था पर वो उठी ही नही ? नरेश- किसी को बताना नही उसे कुछ दिन से ड्रग्स लेने की आदत पड़ गई है. अच्छा मैं गेट पर चलता हू. कोई दिक्कत हो तो इंटरकम पर बता देना. आशु- ओके अब मैं भी थोड़ा आराम करूँगा. बिल्डिंग मे दुबारा पहुचने मे 2 बज गये थे. घर की सफाई करने मे कब 6 बजे पता ही ना चला. तभी कार के रुकने की आवाज़ आई. मेडम ने अंदर आते हुए कहा- दीपा कहा है ? आशु- मेडम मैं दुबारा उपर नही गया. देखने जाउ ? दीपिका- नही, वो गयी होगी अपने दोस्तो के साथ. मेरे सिर मे काफ़ी दर्द है. तुम एक बढ़िया सी कॉफी बना कर आधे घंटे बाद मेरे बेड रूम मे ले आना. उससे पहले नहा ज़रूर लेना. कितनी गंदे लग रहे हो. आशु-जी. आधे घंटे बाद मैं कॉफी लेकर मेडम के बेडरूम के बाहर खड़ा था. नॉक करने पर अंदर से आवाज़ आई, दरवाजा खुला है.. अंदर आ जाओ. कमरे के अंदर जाते ही एक दिन मे तीसरी बार मेरा लंड भड़क गया. मेडम एक स्किन कलर की नेट वाली नाइटी पहने बाथरूम से बाहर निकल रही थी. नाइटी के नीचे से उनकी ब्लॅक ब्रा सॉफ दिखाई दे रही थी. नाइटी की लंबाई उनके हिप्स तक थी और छाती के पास केवल एक बटन लगा था. 36डी साइज़ के बूब्स के उभार के कारण उनकी नाइटी नीचे से खुल गयी थी और पूरे पेट और नाभि के दर्शन हो रहे थे. नीचे उन्होने ब्लॅक पॅंटी पहनी थी. पॅंटी के नीचे गोरी पूरी टाँगे एकदम नंगी थी. मेडम- कॉफी साइड टेबल पर रख दो और यहा आ जाओ. मेडम का अंदाज मादक था. पर मेरे कानो ने जैसे कुछ सुना ही नही था. मैं एकटक मेडम के बूब्स को ही देख रहा था. मेडम ने मेरे हाथ से ट्रे ले कर टेबल पर रखी और हाथ पकड़ कर बेड पर बैठा दिया..मैं जैसे सपना देख रहा था. मेडम- क्या देख रहे हो. यह सुनकर मुझे झटका सा लगा और मे तुरंत उछल कर खड़ा हो गया. आशु- ज..जी सॉरी मेडम. मेडम- मेरी टाँगो मे बड़ा दर्द हो रहा है. क्या तुम थोड़ा दबा दोगे. आशु-जी मेडम. और मैं मेडम की टांगो के पास बैठ गया. मेडम की गोरी मखमली टाँगो पर एक भी बाल नही था. उनके बदन से भीनी-भीनी महक आ रही थी. मैने एक टांग को हाथो मे लेकर दबाना शुरू किया. तभी मेडम चीख पड़ी- क्या करते हो ? आराम से दबाओ और ये लो थोड़ा आयिल भी लगा दो. मैने वैसे ही हल्के हाथ से मालिश शुरू कर दी. मेडम आँखे बंद करके और घुटने मोड़ कर लेटी रही. मेरी नज़र फिर मेडम के मोटे-मोटे बूब्स पर जा टिकी जो ब्लॅक ब्रा के बाहर झाँक रहे थे. मेरे पूरे शरीर मे चीटिया सी रेंगने लगी थी. पर अबकी बार मैने अपने होश नही खोए. मेडम (बंद आँखे किए हुए)- अब थोड़ा उपर करो. यह सुनकर मेरे हाथ मेडम के घुटनो पर पहुच गये. मेडम (बंद आँखे किए हुए)- थोड़ा और उपर. मैं मेडम के घुटनो से जाँघ की मालिश करने लगा. जब भी मेरे हाथ नीचे से उपर की ओर जाते थे. मेडम साँस रोक लेती थी. मेडम (बंद आँखे किए हुए)- थोड़ा और उपर. आशु- वाहा तो आपकी पॅंटी है, वो तेल से गंदी हो जाएगी. मेडम- तो फिर उसे उतार दो ना. मैने वैसा ही किया. अब मेडम बूब्स के नीचे से पूरी नंगी थी. 2 मिनिट बाद मेडम ने अपनी मुड़े हुए घुटने फैला दिए. जिस जगह पर हमारा लंड होता है वाहा पर मेडम का केवल एक हल्का सा उभार था, जो की बीच से कटा हुआ था. वाहा पर बाल एक भी नही था. मेडम (बंद आँखे किए हुए)- अब ज..जाँघ को करो. मेरे दोनो हाथ मेडम की गोरी चित्ति जाँघो को धीरे से सहला रहे थे. हाथ जब भी मेडम के कटाव के पास पहुचते तो मेडम अपने दाँत भींच लेती. मेरी समझ मे कुछ नही आ रहा था. शायद मेडम बहुत थॅकी हुई थी और मेरी मसाज से उन्हे आराम मिल रहा था. मेडम (आँखे बंद किए हुए ही)- अब मेरी चिड़िया की भी मालिश करो. आशु- मेडम आपकी चिड़िया कहा है ? मेडम- अरे बुद्धू मेरी चूत के उपर जो दाना है वही चिड़िया है. आशु- मेडम ये चूत कहा होती है ? तब मेडम ने अपने दोनो हाथो से अपने कटाव की दोनो फांको को खोल दिया- ये चूत है. फिर अपनी उंगली चूत के उपर के दाने पर लगा कर कहा ये चिड़िया होतो है. अब इसकी मालिश करो. मैं मेडम की दोनो टाँगो के बीच बैठ गया और मेडम की चिड़िया को सहलाने लगा. थोड़ी देर मे ही मेडम की टाँगे मचलने लगी. मेडम-थोड़ा तेज करो.......थोड़ा तेज.........और तेज....तेज. मैं मेडम के कहे अनुसार अपनी रफ़्तार और दबाव बढ़ता गया. मेडम- टाँगो पर तो बड़ा दम दिखा रहे थे. एक चिड़िया को नही मार सकते. थोड़ा तेज हाथ चलाओ ना. यह सुनकर मैने मेडम की चूत को अपने बाए हाथ की 2 उंगलियो से खोला और दाए अंगूठे मे आयिल लगा कर मेडम की चिड़िया को बुरी तरह रगड़ने लगा. अब मेडम बुरी तरह छटपटाने लगी. मुँह से इश्स..हा..स..हा निकल रहा था. टाँगे इधर उधर नाच रही थी. अपने हाथो से मेरे बालो को पकड़ कर मेरे सिर को अपनी चूत की तरफ दबाने लगी. मेडम जितना तेज सिसकती, मेरी बेरहमी उतनी ही बढ़ती जाती. अचानक मेडम के मूह से जोरदार चीख निकली-आआआआआआअहह और चूत से एक जोरदार पिचकारी निकल कर मेरे मूह पर आ पड़ी. मैने सोचा मेडम ने मेरे मूह पर यूरिन कर दिया है. थोड़ा मेरे मूह मे भी चला गया था. उसका स्वाद अजीब सा था पर स्वादिष्ट था. मेरी जीभ अपने आप ही बाहर निकल कर मेरे मूह को चाटने लगी. मेडम ने मेरे अब तक चल रहे हाथो को ज़ोर से पकड़ लिया और बोली- तेरे हाथ तो रैल्गाड़ी की तरह चलते है. तेरी मालिश ने तो मेरी टाँगो की सारी थकान निकाल दी. पर मुझे अनमना देख कर मेडम थोड़ा अटकी और पूछा - क्या हुआ ? आशु- क्या मेडम आप भी ना. अपने मेरे मूह पर ही यूरिन कर दिया. मेडम ज़ोर के खिलखिला उठी- पगले ये यूरिन नही स्त्री-रस होता है. केवल इस रस से ही पुरुषो की प्यास बुझ सकती है. आशु- ओह....हा इसका स्वाद तो बहुत अच्‍छा था. मेडम- मैने तेरी प्यास बुझाई अब तू मेरी भी बुझा. आशु- मेडम मेरे पास तो कोई चूत या चिड़िया नही है. आपकी प्यास कैसे बुझाउ. मेडम फिर खिलखिला उठी. वो उठी और मुझे बेड पर लिटा दिया. मेडम ने मेरी पॅंट उतार दी. मेरे अंडरवेर मे 8 इंच का उभार बना हुआ था. मेडम- अरे तुमने तो यहा एक तंबू भी लगा रखा हा. इस तंबू का बंबू कहा है? मैं शर्म के मारे कुछ नही बोला. मैं जिस बात को सुबह से छिपा रहा था, मेडम सीधे वहीं पहुच गयी थी. मैं बिना हिले दुले पड़ा रहा. अब मेडम ने मेरे अंडरवेर के अंदर हाथ डाल कर मेरे लंड को पकड़ लिया. मेडम एक दम सन्न रह गयी. फिर अगले ही पल मेरा अंडरवेर भी उतर गया. मेडम- ये क्या है. पत्थर का इतना मोटा मूसल लगा रखा है. मैने आज तक नही इतना मोटा नही देखा. इसे कौन सा तेल पिलाते हो. मैं चुप ही रहा पर मेरा लंड... मेरा लंड जुंगली शेर की तरह दहाड़े लगा रहा था. मेडम ने अपने कोमल हाथो से मेरे लंड को दोबारा नापा. अंडरवेर के अंदर उनको लंड की इतनी मोटाई का विश्वास नही हुआ था. लंड को हल्का सा सहलाने के बाद उन्होने उसे बीच से कस कर पकड़ लिया और नीचे खिचने लगी. मेडम का मूह मेरे लंड के ठीक उपर था और जीभ लप्लपा रही थी. जैसे -जैसे लंड की काली खाल नीचे जा रही थी एक चिकना-गोरा-बड़ी सी सुपारी जैसा कुछ बाहर निकल आया. आशु- मेडम ये क्या है. मेडम- इसको सूपड़ा कहते है. जैसे मेरी चिड़िया ने तेरी प्यास बुझाई थी वैसे ही मेरी प्यास इस से बुझेगी. यह कहकर मेडम ने मेरे लंड को सूँघा. पता नही कैसी स्मेल थी पर मेडम एक दम मदहोश हो गयी. फिर धीरे से उन्होने अपनी जीब मेरे सूपदे पर फिराई और चाटने लगी. पूरे लंड को उपर से नीचे तक चाटने के बाद, मेडम ने सूपदे के मूह पर अपना मूह लगा दिया. उनका मूह पूरा खुला हुआ था. उन्होने एक हाथ से खाल को नीचे खीचा हुआ था. फिर धीरे-धीरे मेडम मेरे लंड को निगलने लगी. देखते ही देखते लंड का सूपड़ा मेडम के गले तक पहुच गया. अब भी मेरा लंड 2 इंच बाहर था. फिर मेडम ने मेरे लंड की लंबाई-चौड़ाई अपने मूह से नापने के बाद उसे बाहर निकाला. मेडम के मूह मे लार भर गयी थी जो उन्होने लंड पर उगल दी और एक गहरी साँस ली. अब मेरा लंड पूरा भीग गया था. मेडम उसे कुलफी की तरह चूसने लगी. बार बार मेरा लंड उनके मूह से बाहर आता फिर तुरंत अंदर चला जाता. मेडम की तेज़ी बढ़ती जा रही थी. बीच-बीच मे मेडम अपने बाए हाथ मे पकड़ी खाल को भी उपर नीचे कर देती थी. इस सब से मैं भी मदहोश हो रहा था. मैने सोचा ऐसे मेडम की प्यास तो पता नही कैसे बुझेगी, पर मेरी हालत अब काबू से बाहर थी. जो आवाज़े पहले मेडम निकाल रही थी, वैसी ही आवाज़े अब मेरे मूह से अपने आप निकल रही थी. टाँगे फदक रही थी और हाथ मेडम के सिर पर अपने आप पहुच गये थे. पर इस सब से मेडम को कोई फरक नही पड़ा था. पूरे 10 मिनिट तक चूसने के बाद मेडम ने मेरा लंड से मूह उठाया और फिर लंबी साँस ली और बोली- बड़ा स्टॅमिना है तेरे मे. पर मेरा नाम भी दीपिका है, मैं अपनी प्यास बुझा कर ही रहूंगी. अगले ही पल जोरदार चुसाई चालू हो गयी. मेडम को पता नही क्या जुनून था. पर इससे मुझे क्या, मैं तो जन्नत की सैर कर रहा था. अचनांक पता नही मेरे अंदर से कोई तूफान मेरे लंड की ओर बढ़ता सा लगा. अचनांक बहुत मज़ा सा आने लगा, जो शब्दो मे बताना असंभव है. म्‍म्म्ममममममममममममममममममममह - एक ज़ोर की आवाज़ निकली. पता नही क्या हो रहा था पर मुझे इतना मज़ा इससे पहले कभी नही आया था. मेरा रोम-रोम निहाल हो रहा था. जिस शांति की तलाश मे मेरा लंड अब तक भटक रहा था वो अजीब सी शांति मेरे लंड को मिल रही थी. इधर मेडम ने भी उपर नीचे करके चूसना छोड़ कर अपने होंठ मेरे सूपदे पर कस लिए. वो पूरा ज़ोर लगा कर मेरे लंड को आम की तरह चूसने लगी. 5-7 सेकेंड तक मेरे लंड से कुछ निकलता रहा और मेडम उसे निगलती रही. अच्छी तरह लंड की खाल को उपर तक निचोड़ लेने के बाद ही मेडम ने अपना मूह मेरे लंड से हटाया. मेडम की आँखे बंद थी. पता नही क्या हो रहा था पर मुझे नींद सी आने लगी थी. मेडम ने 1 मिनिट तक चुप रही फिर बाकी का भी निगल गयी. फिर मेडम ने मेरे लंड के सूपदे को चूमा और बोली- क्यो आया मज़ा ? आशु- मेडम क्या आपकी प्यास बुझ गयी. मेडम ने मादक अंगड़ाई लेकर कातिल नज़रो से मुझे देखा और बोली- पता नही बुझी या तूने और भड़का दी. तेरी रस का स्वाद कुछ अलग सा था एक दम ताज़ा. कोई खास बात है क्या ? आशु- मेडम आज से पहले मुझे ऐसा मज़ा कभी नही आया. मुझे तो पता भी नही था की मेरे अंदर भी कोई रस होता है. मेडम- यानी आज तेरा पहली बार का रस निकला है... तभी मैं कहु... मेडम की आँखे चमक उठी और कुछ सोचकर बोली -तू अपना समान सर्वेंट क्वॉर्टर से लाकर बगल वाले रूम मे रख ले ना. अब तू हमारे साथ ही रहेगा, पता नही कब कौन सा काम पड़ जाए. मैं हैरानी से एक टक मेडम को देखता रहा पर कुछ ना बोल सका. मेडम- अच्छा अब तेरी नौकरी भी पक्की और सॅलरी भी डबल. और बोल क्या चाहिए ? आशु- मेडम क्या आप मेरे काम से इतनी खुश है? मेडम- हा. और कुछ मन मे हो तो वो भी माँग ले. आशु- जी कुछ नही चाहिए. मेडम- तू बोल तो सही. आशु- रहने दीजिए...पर मेडम आपकी कॉफी तो ठंडी हो गई. मेडम- तेरा रस पी लिया तो कॉफी कौन पिएगा....चल तुझे एक खेल सिखाती हू...तूने कभी चूत लंड की लड़ाई देखी है... आशु- जी नही, कैसे खेलते है बताइए ना. क्रमशः.................. part--2

हिंदी सेक्सी कहानियाँ pyari पार्ट--1

मोनू जाशी ने प्रकाशित किया


हिंदी सेक्सी कहानियाँ पार्ट--1 यह कहानी है हम 3 दोस्तो की. बबलू, विक्की और मैं आशु (निकनेम्स), हम तीनो देल्ही के साउत-एक्स इलाक़े मे पले- बढ़े हैं. हम तीनो ही अप्पर मिड्ल क्लास से थे. पैसे की कोई टेन्षन नही पर लिमिट भी थी. दिन मे स्कूल-कॉलेज फिर शाम को साउत-एक्स मार्केट मे तफ़री. हमारी मार्केट की खास बात है कि यहा सिर्फ़ हाई-फाइ लोग ही शॉपिंग करने आते है. यह अमीरो की मार्केट जो है. एक से एक सेक्सी कपड़ो मे सुन्दर-गोरी लड़किया ही मार्केट की रौनक थी. बाकी दुनिया मल्लिका सहरावत, नेहा धूपिया, एट्सेटरा. हेरोयिन्स को जिन कपड़ो मे सिर्फ़ फ़िल्मो मे ही देख पाते है, हम उन्हे अपनी आखों के सामने देखते थे. हर लड़की के साथ कोई ना कोई बाय्फ्रेंड ज़रूर होता था. कोई लीप किस कर रहा है तो कोई कमर मे हाथ डाल कर चल रहा है. इतने शानदार नज़ारो को देखते हुए रात के 10-11 बज जाते थे. ये जश्न तो उसके बाद भी चलता रहता था पर घर पर डाँट पड़ने का भी डर होता था, इसलिए हम 11 बजे तक घर पहुच जाते थे... ऐसे हस्ते खेलते आँखे सेकते लाइफ कट रही थी, पर अचानक हमारी जिंदगियो मे बवंडर आ गया. हम तीनो बी.कॉम के फाइनल एअर के एग्ज़ॅम मे लटक गये. कॉलेज से रिज़ल्ट देख कर घर जाते समय हम एक ख़तरनाक फ़ैसला कर चुके थे... 4 दिन बाद हम तीनो मुंबई के वीटी स्टेशन पर उतरे. घर वालो का पता नही क्या हाल था. हम तीनो के पास अपने कुल 5500 रुपये थे. हमे पता था कि मुंबई मे ये 5-6 दिन से ज़्यादा नही चलेंगे. स्टेशन से सीधे हम विरार मे विक्की के दोस्त श्याम के पास पहुच गये. श्याम अपनी प्लेसमेंट एजेन्सी चलाता था. हमने उससे रहने की जगह का बंदोबस्त करने को कहा और नौकरी का भी इन्तेजाम करने को कहा. फिर हम निकल पड़े मुंबई नगरी के जलवे देखने. शाम को वापस पहुचने पर श्याम का चेहरा खिला हुआ था. विक्की- क्यो दाँत दिखा रहा है बे ? श्याम- अबे मैदान मार लिया. तुम तीनो सुनोगे तो मेरा मूह चूम लोगे. विक्की- कुत्ते तूने हमे गे समझ रखा है क्या ? तेरा मूह तोड़ देंगे. श्याम- अरे भड़क क्यो रहा है यार...मैने तुम्हारे लिए ऐसे कामो का इन्तेजाम किया है कि तुम जिंदगी भर मुझे याद रखोगे. ये लो जॉब कार्ड्स और कल सुबह 10 बजे तक अपनी-अपनी नौकरी पर पहुच जाना. मैने कहा- थॅंक यू श्याम भाई. फिर हम तीनो रात बिताने के लिए अपना समान उठाकर श्याम की बताए जगह पर पहुच गये. सुबह के 9.50 हो चुके थे और मैं अपनी नौकरी की जगह के सामने खड़ा था. जुहू मे एक शानदार सफेद रंग का बंग्लॉ था. मैं गेट और बिल्डिंग के बीच शानदार लॉन था जिस पर 1 छतरी, 2 कुर्सी और 1 मेज लगे थे. मैनगेट पर वॉचमन खड़ा था. उसके पास पहुच कर मैने जॉब कार्ड दिखाया और बोला- नौकरी के लिए आया हू. वॉचमन- मुंबई मे नये हो ? मैं (आशु)- हा. पहले देल्ही मे था. वॉचमन- फिर तो मुंबई मे टिक जाओगे, देल्ही तो मुंबई की बाप है. फिर उसने इंटेरकाम पर बात की और छोटा गेट खोल दिया और बोला- सीधे अंदर बिल्डिंग के पीछे चले जाओ. मेडम वही मिलेंगी. मैने अपना समान उठाया और बिल्डिंग के पीछे पहुच गया. बिल्डिंग के पीछे का नज़ारा आगे से भी शानदार था. वाहा भी हरियाली थी और बाउंड्री वॉल बहुत उँची थी. बिल्डिंग के साथ एक बहुत बड़ा स्विम्मिंग पूल बना था जिस पर सूरज रोशनी पड़ने से तेज चौंधा निकल रहा था. कुछ सुन-बात कुर्सी पड़ी थी और एक पर कुछ टवल जैसे कपड़े पड़े थे. एक कॉर्डलेस फोन भी पूल की मुंडेर पर रखा था. पर वाहा पर कोई मेडम नही थी. मैं वापस गेट के लिए मुड़ने ही वाला था कि अचानक पानी की आवाज़ आई. एक 30 साल की हसीना ने स्विम्मिंग पूल के पानी से अपना सिर बाहर निकाला और बोली- तुम ही केर टेकर की नौकरी के लिए आए हो? क्या नाम है तुम्हारा ? आशु- ज..जी म..मेरा नाम आशु है. मेडम- हकलाते हो क्या ? (हंसते हुए बोली) आशु- ज..जी नही. मेडम- ठीक है. अपना समान सर्वेंट क्वॉर्टर मे रख दो और 5 मिनिट मे मैं हॉल मे आ जाओ. देल्ही मे मैने आइटीआइ से हॉस्पिटालिटी, विक्की ने वीडियो फोटोग्रफी और बबलू ने टेलरिंग का कोर्स किया था. यही ट्रैनिंग आज हमारे काम आ रही थी. हमने श्याम को अपने सर्टिफिकेट दे दिए थे और उसने हमारे लिए वैसे ही काम ढूँढ दिए. उधर विक्की और बबलू भी अपनी-अपनी नौकरियो पर पहुच चुके थे. विक्की को एक फिल्म प्रोड्यूसर के पास असिस्टेंट कॅमरामेन जॉब के लिए गया था और बबलू एक टेलरिंग शॉप मे असिस्टेंट मास्टर के लिए. चलिए अपनी कहानी आगे बढ़ते हैं. फिर मैने (आशु) अपना समान उठाया और कनखियो से मेडम की तरफ देखा. पर मेडम फिर पानी मे गायब हो गयी थी. मैं सीधा वॉचमन के पास पहुचा और बोला- भाई अब ये सर्वेंट क्वॉर्टर कहा है. वॉचमन चाबी देते हुए बोला- तीसरा कमरा खाली है, वही तुम्हे मिलेगा. कमरे पर पहुच कर अपना समान रखा और नज़र कमरे को देखा और बाहर निकल गया. सीधे मैं हॉल मे पहुचा, पर वाहा कोई नही था. बिल्डिंग के अंदर क्या शानदार सजावट थी वो शब्दो मे नही बता सकता. एक खास बात थी कि बिल्डिंग की एंट्रेन्स से लेकर सब जगह आदमियो के न्यूड स्कल्प्चर्स (मूर्तिया) लगे थे. औरत की कोई नही थी. मैं हॉल से पीछे स्वीमिंग पूल का नज़ारा साफ दिखाई दे रहा था. तभी स्विम्मिंग पूल से मेडम बाहर निकली... संगेमरमर मे तराशे हुए जिस्म पर पानी से तर-बतर छोटी सी बिकिनी मे मेडम अपने सुन्बाथ चेर के पास पहुचि. सूरज की रोशनी मे मेडम के अंगो का एक एक कटाव और भी गहरा लग रहा था. मेडम की लंबी गोरी टाँगे, बिकिनी से बाहर झाँकते 36डी के बूब्स, पूरी निर्वस्त्रा कमर पर केवल एक डोरी... ये सब देख कर मेरे पूरे शरीर मे कीटाणु रेंगने लगे. दिल धड़-धड़ कर बजने लगा और मेरा लंड बुरी तरह अकड़ गया. टट्टो मे दर्द होने लगा. मेरी पॅंट मे एक पहाड़ सा उभर आया. (आप लोग यकीन मानिए की मैं अब तक (18 साल) ब्रह्मचारी ही था. मेरा वीर्य-पात अब तक नही हुया था और ना ही मुझे इस बारे मे पता था. देल्ही मे माइक्रो-मिनी और ट्यूब-टॉप पहने आध-नंगी लड़कियो की मैं मार्केट मे लड़को के साथ चुहल-मस्ती देखकर भी हम तीन दोस्तो को कभी भी मूठ मारने ख़याल नही आया थी. इसका ही नतीजा था कि मेरा लंड जब खड़ा होता था तो पूरे 8" का पत्थर बन जाता था. और कुछ ना करने पर भी कम से कम आधे घंटे बाद ही शांत होता था.) अब मेरे लिए भारी मुश्किल हो गयी थी. सामने मेडम ने अपना टवल गाउन पहन लिया था और अब मैं हॉल की तरफ आ रही थी. इधर मेरी पॅंट मेरे मन की दशा जग-जाहिर कर रही थी. मैने अपने लंड को शांत करने के लिए थोडा सहलाया पर इससे बेचेनी और बढ़ गयी. और कुछ ना सूझा तो, मैं एक सोफे की पीछे जाकर खड़ा हो गया. इससे मेरी पॅंट को उभार छिप गया था. मेडम मैं हॉल मे आ चुकी थी- पहले कभी कहीं काम किया है ? आशु- जी नही. मेडम- तुम मुंबई कब आए. आशु- जी 1 दिन पहले. मेडम- बड़े लकी हो की एक दिन मे ही जॉब मिल गया. आशु- जी. मेडम- इतनी दूर क्यों खड़े हो यहाँ आओ. मैं जैसे-तैसे वाहा बैठ गया. पता नही मेडम ने पॅंट को नोटीस किया या नही. मेडम- मैं ज़्यादा नौकर-चाकर नही रखती. जीतने ज़्यादा होते हैं उतना सिरदर्द. मुझे अपनी प्राइवसी बहुत पसंद है. वॉचमन को भी बिल्डिंग मे कदम रखने इजाज़त नही है. केवल तुम्हे ही बिल्डिंग मे हर जगह जाने की इजाज़त होगी. इसलिए तुम्हे ही पूरी बिल्डिंग की केर करनी होगी. बोलो कर सकोगे ? आशु- जी. मेडम- वैसे तो इस घर मे कुल 2 लोग ही रहते हैं, मैं और मेरे पति की बेटी दीपा. घर पर खाना नही बनता. इसके अलावा लौंडरी, चाइ-कॉफी, रख-रखाव जैसे छोटे मोटे काम करने होंगे. आशु- मेडम तन्खा कितनी मिलेगी ? मेडम मुस्कुराते हुए बोली- शुरू मे 20000 रुपये महीना मिलेगा. अगर तुम हमारे काम के निकले तो कोई लिमिट नही है. बोलो तय्यार हो ? आशु- ज..जी मेम . मेडम- ठीक है तो उपर दीपा मेडम का कमरा है, उसे जाकर जगा दो. फिर कॉफी लेकर मेरे लिविंग रूम मे पहुच जाना, एकदम कड़क चाहिए. आशु- जी. मैं तुरंत वाहा से निकल लिया. जान बची सो लखो पाए. किचन मे कॉफी मेकर मे कॉफी का समान डाल कर मैं उपर पहुच गया. वाहा 4 कमरे थे. 3 कमरे लॉक थे. मैने चौथे कमरे का दरवाजा नॉक किया, पर कोई रेस्पोन्स नही आया. थोड़ी देर बाद मैं दरवाजे का हॅंडल घुमाया तो दरवाजा खुल गया. अंदर एक दम चिल्ड था. एक गोल पलंग पर एक खूबसूरत सी लड़की सोई थी. एक दम गोरी-चित्ति, ये दीपा थी. उसके कपड़े देख कर देल्ही की याद ताज़ा हो गयी. वही ट्यूब टॉप और माइक्रो मिनी. पर यहा की बात ही अलग थी. वाहा देल्ही मे लड़कियो को डोर से देख कर ही आँखे सेक्नि पड़ती थी और यहा एक अप्सरा मेरे सामने पड़ी थी. आल्मास्ट सोने से दीपा के कपड़े अस्त-व्यस्त हो गये थे. उसकी ब्लू स्कर्ट तो कमर पर पहुच गयी थी और पूरी पॅंटी अपने दर्शन करा रही थी. उपर का वाइट टॉप भी उपर चढ़ गया था और सुन्दर सी ऑरेंज एमब्राय्डरी ब्रा दिखने लगी थी. टॉप और ब्रा के बीच उसकी क्लीवेज भी सॉफ दिखाई दे रही थी. इस हालत मे मैने दीपा को जगाना ठीक ना समझा. मैने वापस गेट के बाहर जाकर पुकारा- दीपा मेम. पर कोई हलचल नही हुई. हिम्मत जुटा कर अंदर गया और पुकारा- दीपा मेम. फिर वही हालात. मैने दीपा को हल्के से हिलाकर फिर पुकारा. पर कोई फायेदा नही. दीपा का कमसिन जिस्म देखकर मेरी हालत फिर सुबह जैसी होती जा रही थी. मेरा लंड पूरे जोश मे आ चुका था और बुरी तरह फदक रहा था. टट्टो मे भी दर्द बढ़ता जा रहा था. अब मैने दीपा को ज़ोर से हिलाया. पर वो तो जैसे बेहोश पड़ी थी. उसकी कलाईयो पर कई जगह छोटे-छोटे लाल निशान बने थे. अब मैं खुद को रोक नही पा रहा था. अब कोई चारा नही था. मैं बेड पर दीपा के बगल मे लेट गया. सब कुछ अपने आप हो रहा था. मेरी नज़र दीपा की क्लीवेज पर गढ़ी हुई थी. इतने साल जो चीज़ देख कर ललचाते थे, वो आज मेरे सामने पड़ा था. हिम्मत और डर दोनो बढ़ते जा रहे थे. फिर धीरे से अपनी उंगली दीपा की क्लीवेज पर फिरा दी. पहली बार उस जगह का स्पर्श पाकर मैं बहकने लगा. अब मेरे हाथो ने उसके बूब्स को कपड़ो के उपर से ढक लिया था. फिर मैं दीपा के योवन-कपोत (बूब्स) को धीरे-धीरे दबाने लगा. इधर मेरे हाथो का दबाव दीपा के बूब्स पर बढ़ता उधर मेरी साँसे और लंड फूलते जाते. फिर मैने उसके टॉप के स्ट्रॅप्स खोल दिए. अब दीपा केवल ब्रा मे थी. ऑरेंज रंग की ब्रा मे उसके बूब्स किसी टोकरी मे रखे सन्तरो की तरह लग रहे थे. मैने उसकी क्लीवेज पर अपनी जीभ फिरानी शुरू की. दोनो हाथो से उसके बूब्स भीच रहा था. थोड़ी देर तक उपर से दबाने के बाद मैं बदहवास सा हो गया था. मुझ बेचारे को क्या पता था कि बूब्स के अलावा भी एक लड़की के पास काम की चीज़े होती हैं. मैं तो इन्ही को देख-देख कर बड़ा हुआ था. इतना सब होने के बाद भी दीपा की तंद्रा (नींद) नही टूटी और मेरी हिम्मत और ज़ोर मारने लगी. अब मैने धीरे से अपना दाया हाथ दीपा की ब्रा मे सरकया. अंदर जाकर मेरे हाथ की उंगलियो के पोर (फिंगर-टिप) उसकी छोटी सी निपल से टकराया. थोड़ी देर मे उसका निपल मेरी दो उंगलियो के बीच फँसा था. मैं उस निपल को मसल्ने लगा. अपने निपल्स के साथ छेड़खानी दीपा सहन नही कर सकी और हरकत करने लगी. उसकी टाँगे मसल्ने लगी और मुँह से इश्स..स.सस्स की आवाज़े निकलने लगी. दीपा का हाथ अपनी जाँघ के बीच पहुच गया और धीरे-धीरे जाँघो के बीच मसलने लगा. जैसे-जैसे वो मसल्ति जाती वैसे-वैसे उसकी सिसकारिया तेज हो रही थी. अचानक एक तेज आवाज़ सुनाई दी- आशु...कॉफी... मैं एक झटके मे बेड से उछल कर खड़ा हो गया. और भागता हुआ किचन मे पहुचा. कॉफी मेकर का स्विच ऑन किया. 5 मिनिट बाद मैं कॉफी ट्रे मे लेकर मेडम के पास खड़ा था. क्रमशः............ part--१

भव्या की प्यारी चुदाई

प्रकाशित मोनू जोशी

भव्या की प्यारी चुदाई


mere dost की kahaani

उस दिन मुझसे यह यह सब कैसे हुआ, किन हालातों में हुआ, मैं इससे बिलकुल अनजान था।

बात कुछ ही दिन पुरानी है, भव्या से मेरी पहली मुलाकात तब हुई थी जब मैं बी ए प्रथम में था। मैं उसे शुरू से ही पसंद करता था। शायद वो भी मुझे पसंद करती थी। उसके पापा भी मेरे पापा के अच्छे मित्र हैं इसलिए अंकल भी मुझे अच्छे से जानते थे।

पिछले महीने ही हमारी अर्धवार्षिक परीक्षा समाप्त हुई हैं
२७ नवम्बर को हम (मैं, भव्या, रोहित, आशीष, अनुज, नीतिश, के के) लोगों ने पार्टी रखी थी।

हम सब लोग सही समय पर पहुच गए थे। भव्या आज कुछ ज्यादा ही सुन्दर लग रही थी। उसके कसे हुए बूब्स वाकई में बहुत अच्छे लग रहे थे। मैं तो बार बार उन्हीं को देख रहा था। शायद वो समझ गयी थी कि मैं उसके बूब देख रहा हूँ।            

खैर हम लोगों की पार्टी रात १० बजे तक चली। खूब मज़ा किया हम सबने !गाड़ी सिर्फ मेरे पास ही थी इसलिए सबको घर छोड़ने मुझे ही जाना था। आखिर में सिर्फ मैं और भव्या ही रह गए थे।
मैंने गाड़ी उसके घर की तरफ मोड़ दी।

जैसे ही मैंने उसको उसके घर पर उतारा तो वो बोली-अन्दर आ जाओ !
मैंने मना तो बहुत किया पर वो मुझे अन्दर ले ही गई। शायद उसका मन भी चुदने का था।

फ़िर धीरे से उसने मुझे अपने पास बिठाया और मुझसे बातें करने लगी।
सच में, मादरचोद, उसकी चूचियाँ देखकर तो मेरे मुँह में पानी आ गया। उसने मुझे देख लिया और बोली- स्वप्निल ! तुम मुझे पसंद करते हो ना?
मैंने भी हाँ कह दिया।

वो बोली- मैं तो कबसे तुमसे अपने को चुदवाना चाहती हूँ, पर कभी मौका ही नहीं मिला ! आज प्लीज़ !मेरी प्यास बुझा दो !
मैंने मन ही मन कहा- नेकी और पूछ पूछ !

मैंने भी ठीक पलटवार करते हुए कहा- भव्या ! तुम तो ना जाने कितनी बार मेरे सपनों में चुद चुकी हो ! आज पहली बार असल में मौका मिला है, मैं इस मौके को हाथ से जाने नहीं दूंगा।

फ़िर मैंने आव देखा ना ताव ! उसकी चूचियों पर हाथ रख कर उन्हें पकड़ लिया। सच में मज़ा आ गया।
क्या स्तन थे नरम नरम !

लेकिन वो भी कम नहीं थी, उसने मेरी तीसरी टांग को पकड़ लिया था। इससे पहले मैं कुछ करता, वो मेरी ज़िप खोल चुकी थी और मेरा लण्ड चूस रही थी।

वाकई में क्या मज़ा आ रहा था !
दस मिनट तक लण्ड चुसवाने के बाद मैंने उसकी ब्रा को खोल कर उसके सेक्सी बूब्स को आज़ाद कर दिया।

कैसी मासूमियत के साथ हिल रहे थे वो !
फ़िर मैंने उसके सारे कपड़े उतार कर फ़ेंक दिए।

उसकी हल्के बालों वाली बुर देख कर तो मैं उस पर टूट पड़ा।
वो अब सिसकियाँ ले रही थी और गर्म हो रही थी।

फ़िर मैंने अपना ७.६ इन्च लम्बा लण्ड उसकी बुर में डाल दिया।

शुरूआत में थोड़ा खून जरूर निकला पर ५ मिनट बाद सब ठीक हो गया।
उसको कुतिया बना कर मैं चोदे जा रहा था। १५ मिनट तक उसकी बुर मार मार कर उसकी फ़ाड़ डाली मैंने। फ़िर उसने पानी छोड़ दिया।
लेकिन मैंने उसकी गाण्ड को फ़िर मारा और १० मिनट के बाद अपना लावा उसके बूब्ज़ पर डाल दिया।

फ़िर मैंने उसको एक लम्बा चुम्बन दिया और मैं अपने घर लौट आया।
                    आपकी प्यारी मोनू 
                                   ईमेल sexisalipunem@gmail.com


 

रविवार, 24 अक्टूबर 2010

reena के साथ असली आनन्द


मैं आपको अपनी कहानी बताता हूँ।
ये मेरे जीवन की सच्ची कहानी है। मैं प्रोफेशन से एक कॉलबाय हूँ।

मैं एक दिन घर पर था, मुझे उस दिन फ़ोन-काल आया, किसी सिमरन नाम की लड़की का। उसने मुझे अपने घर मालिश करने के लिए बुलाया। उसने मुझे अपना पता दिया, वो भी फरीदाबाद की ही रहने वाली थी। वह बड़े परिवार से थी। उसकी शादी हो चुकी थी, उसके पति एक महीने के लिये कनाडा गये हुए थे।

जब मैं उसके घर पहुंचा तो मैंने एक २२ साल की लड़की को देखा। बहुत ही सुंदर और बहुत ही स्टाइलिश टाइप की लड़की थी। जब उसने मुझे देखा तो वो मेरे बारे में पूछने लगी। मैंने उसे बताया कि किसी सिमरन का फोन आया था ! मैंने जैसे ही उसे अपना नाम बताया तो उसके चेहरे पर अजीब सी मुस्कान आ गई। तभी मैं समझ गया ये ही सिमरन है।

उसने मुझे घर में आने के लिए कहा, पानी दिया और मैं बैठ गया।
उसने मुझसे कहा- मुझे मसाज करानी है ! अच्छे से कर दोगे तो जितना बोलोगे उतना पैसा दे दूंगी।
मैंने कहा- ठीक है।

वो अपने कमरे में चली गई, तभी वो अपने कपड़े बदल कर आई। जब वो आई, मैं उसे देखता रहा। उसने मुझे अपने कमरे में बुलाया और बोली- आराम से मालिश करना जो मजा आ जाये !
मैंने कहा- ठीक है !

मैंने जैसे ही उसका गाउन उतारा, वो मेरे सामने बिल्कुल नंगी खड़ी थी, उसका बदन कोमल, नाज़ुक और गोरा था। उसका कद ५'९" होगा, उसका बदन ३६-२८-३६ का होगा। मैंने जैसे ही उसके चुचियों का हाथ लगाया और दबाया, वो सिस्कियाँ भरने लगी। तभी मैं समझ गया कि ये प्यासी है।
मैंने उसे बैड पर लेटा लिया, मैं भी सिर्फ अंडरवियर में ही था। मैं उसकी मालिश कर रहा था, उसे मजा आ रहा था।

अचानक उसने मेरा हाथ पकड़ा, मुझे अपने उपर ले लिया और बोली- मसाज को छोड़ो ! अब आप मेरी प्यास को बुझा दो ! जितने पैसे बोलोगे उतने दूंगी।

वो बहुत प्यासी थी। मैंने कहा- ठीक है, जैसे आप चाहें !
मैंने अपने होठों को उसके होंठों पर रख दिया। अब वो मेरे होंठो का रस चूसने लगी, मैं भी उसके होंठों का रस लेने लगा। तभी वो वोली- मजा आ रहा है तुम्हारे होंठ तो बहुत प्यारे हैं !

रीना मेरे लण्ड को पकड़ कर चूसने लगी, तभी वो सीधे लेट गई और बोली- मुझे चोदो !
मैंने अपना लण्ड उसकी चूत पर लगाया और जोर से धक्का दिया तो वो चिल्ला उठी। उसकी आँखों से आंसू तो निकल रहे थे मगर उसे मजा भी आ रहा था। वो मुझे छोड़ने को तैयार ही नहीं थी। मैं उसे परेशान करने लगा। कभी मैं उसकी चूत में अपने लण्ड को घुसाता और निकाल कर शान्त हो जाता, मैं उसे तड़पा रहा था, वो बार बार मुझे अपनी तरफ खींचती और कहती- क्या कर रहे हो? प्लीजजजजजज करो ना !

मैं फिर शुरु हो जाता। मैं ३ घण्टे उसे मजा देता रहा और मजा लेता रहा। ३ घण्टे बाद मैं डिस्चार्ज हो गया। वो जोर जोर से साँस ले रही थी। मैंने उसके होंठो को चूसना शुरु कर दिया। वो बोली- मुझे ऐसा मजा कभी भी नहीं आया ! तुमसे पहले बहुत आये मगर तुम्हारे आगे सब बेकार हैं। मुझे तुमसे मिलकर अच्छा लगा।

फिर हम दोनों नहाने चले गये, एक साथ नहाये। जब हम नहाकर बाहर आये, वो मेरे बदन को पोंछ रही थी, मैं उसके बदन के पानी को अपनी जीभ से चाट रहा था। उसकी आँखें बंद हो गई और सीत्कार करने लगी- अअऽ॥अअअअअआहऽऽऽहहहहह। यह भी थोड़ी देर तक चलता रहा। फिर वो मुझे फरीदाबाद मैं शिव रेस्टॉरेन्ट, १७ सेक्टर में ले गई। हम दोनों ने खाना खाया।

उसने मुझे अपने साथ सोने को कहा मगर मुझे घर जाना था इसलिए मैंने मना कर दिया।
तो बोली- अब कब आओगे?

मैंने कहा- जब आप बुलाओगी, आ जाऊंगा !
उसने मुझसे पूछा- कितना दूँ?
मैंने कहा- जितना आप चाहो !

उसने मुझे दस हजार दिये और मैं अपने घर आ गया।
रात को उसका फिर फोन आया और हम दोनो ने रातभर सैक्सी बाते की।

जब भी रीना  का दिल करता है वो मुझे ही बुलाती है। मैं भी उस मज़े को भूल नहीं सकता।
मैंने सैक्स कई बार किया है मगर ऐसा मजा मुझे पहली बार आया !

 रीना  आग है।

सिर्फ एक ही तार से घर में मिलेंगी फोन, केबल एवं इंटरनेट सेवाएं

अब किसी आवासीय सोसायटी या फिर व्यावसायिक इमारत में माइल कनेक्टिविटी यानी घर के अंदर

तक फोन, इंटरनेट और केबल की अलग-अलग कंपनियों के कनेक्शन के लिए अलग-अलग तारों का जाल बिछाने और बार-बार खुदाई के की जरूरत नहीं होगी। सिर्फ एक ही ऑप्टिक फाइबर तार से सभी सेवाएं उपभोक्तातक पहुंचाई जा सकेंगी।

इस तरह की न्यूट्रल एक्सेस नेटवर्क (नैनो) प्रौद्योगिकी पेश कर रही दूरसंचार ढांचा क्षेत्र की कंपनी रेडियस इन्फ्राटेल प्राइवेट लि. (आरआईपीएल) ने राजधानी के द्वारका इलाके की कई आवासीय सोसायटियों में नैनो प्रौद्योगिकी तंत्र स्थापित करने का करार किया है।

आरआईपीएल के मुख्य कार्यकारी अधिकारी रजनीश वाही ने से कहा, के जरिए हम सेवा प्रदाता को फाइबर टू होम (एफटीटीएच) ढांचा उपलब्ध कराते हैं। इसके जरिए किसी भी आवासीय परिसर या व्यावसायिक केंद्र में दूरसंचार, इंटरनेट और टीवी प्रसारण से संबंधित सेवाएं सिर्फ एक नेटवर्क से पहुंचाई जा सकती हैं। कंपनियों को इसके लिए अलग-अलग नेटवर्क बिछाने की जरूरत नहीं होगी। वाही ने बताया कि आरआईपीएल ने इस प्रौद्योगिकी के पेटेंट के लिए आवेदन किया है। कंपनी ने एक साल में 60,000 फ्लैटों में यह सुविधा देने का लक्ष्य रखा है। सेवा प्रदाता से करार के तहत कंपनी लास्ट माइल नेटवर्क का 10 से 15 साल तक रखरखाव करेगी।

वाही ने कहा कि यह प्रौद्योगिकी बड़े बिल्डरों की नई आवासीय परियोजनाओं के लिए अधिक उपयोगी है। उन्हें अलग-अलग सेवा के लिए विभिन्न कंपनियों को जगह नहीं देनी पड़ती। साथ ही अलग-अलग नेटवर्क बिछाने की जरूरत न होने से सेवा प्रदाता कंपनियों की लागत कम होती है।

आरआईपीएल दिल्ली के अलावा गुड़गांव, गाजियाबाद, नोएडा, इंदिरापुरम और ग्रेटर नोएडा में कई व्यावसायिक परिसरों तथा फ्लैटों में नैनो प्रौद्योगिकी लगा रही है। वाही ने कहा कि पूरे राज्य को इस तरह के नेटवर्क से जोड़ा जा सकता है। हमारी कई राज्यों से इस प्रौद्योगिकी के करार के लिए बातचीत चल रही है।

आरआईपीएल ने 2013 तक छह लाख फ्लैटों में नैनो प्रणाली पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। कंपनी हैदराबाद, पुणे और चंडीगढ़ जैसे शहरों में प्रवेश की तैयारी में है।

वाही ने बताया कि कंपनी ने अगले पांच साल में 5,000 करोड़ रुपए का निवेश करने की योजना बनाई है। उन्होंने कहा, एयरटेल के साथ कई परियोजना पर काम कर रहे हैं। एमटीएनएल के साथ राष्ट्रमंडल खेलों के दौरान हमने काम किया था, और आगे भी उसके साथ काम करने की संभावना है। वाही के अनुसार, उच्च प्रौद्योगिकी वाले घरों की काफी डिमांड है, जिसमें नैनो खासा योगदान दे सकती है। नैनो नेटवर्क के जरिए भवन प्रबंधन सेवाएं (बीएमएस) भी दी जा सकती हैं। इसके जरिए बिल्डर कई तरह की सेवाएं-। वीडियो इंटरकॉम, एक्सेस कंट्रोल, पावर मैनेजमेंट, सीसीटीवी, वाईफाई आदि उपलब्ध करा सकेंगे। प्रीपेड इलेक्ट्रिसिटी, एनर्जी ऑडिट सिस्टम, आरएफआईडी, चाइल्ड टैकिंग सिस्टम का संचालन भी इसके माध्यम से किया जा सकता है।प्रकाशित -मोनू जोशी 

शनिवार, 23 अक्टूबर 2010

हिंदी सेक्स(प्यार तो यार है )कहानिया

 २३-१0-२०१० 
 
 
 
 by मोनू जोशी 
 
 
 
अचानक   उस लड़के ने गाड़ी आगे बढ़ा दी. 50 मीटर बाद गाड़ी रुक गयी और गेट खुला. एक लड़का उतर कर ओट मे हो गया. गाड़ी मूड गयी और 100 मीटर दूर जाकर फिर मूडी. एक और लड़का गाड़ी से उतरा और ओट मे हो गया. 2 मिनिट बाद गाड़ी धीरे से आगे बढ़ने लगी.

दोनो लड़के एक साथ ओट से बाहर निकले और निशा पर झपाटे.
निशा- कौन हो तुम...क्या चाहते हो...
लड़का- अपनी चोंच बंद कर और चुप चाप चल.
निशा- कहा चालू ...मैं तो तुमको जानती भी नही...
दूसरा- चलती है या तेंठूआ कर दू तेरा.
पहला- आबे लड़की के तेंठूआ कहा होता है...
दूसरा- भोंसड़ी के... तू मुझे सिखाएगा...माल उठा और निकल ले...

दोनो ने निशा के हाथ पकड़ लिए थे.
निशा चिल्लाने लगी- प्लीज़ मुझे छोड़ दो....मैं ऐसी लड़की नही हू...
पहला- कोई बात नही..एक बार हमारे साथ चल...तुझे टॉप की रंडी बनाउन्गा.
निशा- छोड़ दो....बचाओ बचाओ...

निशा भी ज़ोर आज़माने लगी. पर इतने मे BMW वाहा पहुच गयी और दोनो ने निशा को अंदर डाल दिया. फिर पहला उसे पकड़ कर अंदर बैठ गया और दूसरा दूसरी तरफ से. अंदर बैठते ही उन्होने निशा के मूह पर कपड़ा बाँध दिया.

पर
 निशा ने छूटने की कोशिश नही छोड़ी. वो बेचारी हाथ पाँव मारती रही. इसी आपा धापी मे उसका हाथ एक लड़के की नाक पर पड़ गया और उसने भी पलट कर निशा पर वार कर दिया. निशा एक ही वार मे बेहोश हो गयी.

ड्राइव कर रहे तीसरे लड़के ने BMW की स्पीड बढ़ा दी. आगे की सीट पर बैठा चौथा लड़का बोला- अबे सालो कपड़े तो उतारो इसके...रात भर पूजा करोगे क्या इसकी.
यह सुन कर पीछे बैठे दोनो लड़के निशा की देह को नंगा करने मे जुट गये. कपड़े टाइट थे इसलिए उतारना मुश्किल हो रहा था और उन तीनो की बेचैनी बढ़ती जा रही थी. उन्होने उसके कपड़े फाड़ना शुरू कर दिया. थोड़ी ही देर मे निशा जन्म-जात नंगी पड़ी थी. उसके गोरा शरीर 4-4 भेड़ियो के सामने नंगा नीचेष्ट था. उसके शरीर पर केवल सेंडल ही बची थी.

पहला- हाए क्या जवानी चढ़ि है छोरी पे...
तीसरा- साली का रंग तो देखो जैसे चाँद ज़मीन पर उतर आया हो...
दूसरा- भाई मुझसे तो रुका नही जा रहा....मैं तो चला...

BMW मे काफ़ी स्पेस और लेगरूवूम था. दूसरे लड़के ने इसका भरपूर फायेदा उठाया और निशा की टाँगे खोल कर उसकी चूत को उजागर कर दिया. फिर उसकी चूत की फांके खोल कर उसमे अपनी जीभ डाल कर चोदने लगा. पहला लड़के ने निशा के मम्मो पर धावा बोल रखा था.

दोनो की आज़माइश से निशा फिर से होश मे आ गयी थी. पर उसने उन पर ये जाहिर नही होने दिया. अपनी चूत से हो रहे खिलवाड़ से वो उत्तेजित नही हो पा रही थी बल्कि अपनी बेबसी पर उसे रोना आ रहा था.

थोड़ी देर बाद BMW रुक गयी. तीसरा (ड्राइव करने वाला)- चलो कुछ खा पी लेते है फिर पूरी रात मज़े लेंगे.
चौथा- हा अब सीधे फार्म हाउस पर चलेंगे.
निशा को इसी पल का इंतेजार था.
दूसरा- तुम जाओ मैं इसकी रखवाली करूँगा.
पहला- इतनी देर से कुत्ते की तरह उसकी चूत चाते जा रहा हा. इसके मूत से अपना पेट भरेगा क्या. चल छोड़ इसे.
दूसरा- भाई मैं तो इसको तैय्यार कर रहा था. पर हरम्जदि का रस ही नही निकल रहा.
चौथा- अबे भोंसड़ी के...बेहोश है तो रस कहा से चोदेगि....
दूसरा- एक बार फार्म हाउस पहुच जाए...फिर पूरी रात इसकी चूत से रस का दरिया बहेगा..
तीसरा- ठीक है. पर अब तो चलो. ये कही नही जाएगी. कार लॉक कर देंगे. दरवाजा खुलेगा तो पता चल जाएगा.
चौथा- और फिर बिना कपड़ो के कहा जाएगी. रास्ते के कुत्ते पीछे पड़ जाएँगे इसको चोदने के लिए. इसकी चूत को भोसड़ी बना कर चोदेन्गे....हहहहहा
हहाहहाहा –चारो की कामिनी हँसी गूँज उठी.
फिर चारो कार को लॉक कर के बार मे चले गये.


दूसरे लड़के को पूरा भरोसा नही था इसलिए वो वापस आया और बेहोश निशा के हाथ बाँध दिए. पैर बाँधने लगा तो उस पर बाकी लड़के चिल्लाने लगे. उसने निशा को देखा और उसके निपल की चुम्मि लेकर डोर लॉक कर के चला गया.

चारो के जाते ही निशा के दिमाग़ के घोड़े दौड़ने लगे थे. कार से बाहर निकल भी गयी तो इस हालत मे कैसे कहा जाएगी. तन पर एक भी कपड़ा नही था. उसके शरीर से नोचे गये कपड़े तो उन लड़को ने पहले ही बाहर फेंक दिए थे.

अब क्या करू ?...आख़िर मे उसने इसी हालत मे बाहर निकलने का फ़ैसला किया. बाहर तो फिर भी बचने के चान्स थे पर अंदर रही तो आज उसकी आज़ादी की आख़िरी रात होगी. यही सोच कर उसने डोर का हॅंडल पकड़ा पर उसे उस लड़के की बात याद आ गयी. गेट खुलते ही साइरन बज जाता और चारो वाहा वापस आ जाते. तभी उसकी दिमाग़ मे बिजली सी कौंधी और वो विंडो का मिरर नीचे करने लगी और बाहर निकल गयी.

बाहर निकल कर देखा तो कार रोडसाइड पर पार्क थी और सड़क एकदम सुनसान थी. दूर तक पेड़ ही पेड़ थे. निशा को रास्ते का समझ नही आ रहा था कि किस दिशा मे जाए. उसने कार की पीछे की दिशा मे जाने का फ़ैसला किया. वो सड़क से उतर कर कच्चे मे आ गयी ताकि इस हालत मे सड़क पे चलने वाले वाहनो से बच सके और फिर किसी मुसीबत मे ना फँस जाए. हर कदम के साथ उसकी रफ़्तार बढ़ती गयी. 10 मिनिट के बाद तो वो पूरा ज़ोर लगा कर दौड़ रही थी. बीच-बीच मे वो मूड-उड़ कर देख लेती.

अबकी बार उसने मूड कर देखा तो उसे 2 रोशनीया अपनी और आती दिखाई दी. उसकी दिल की तेज धड़कने और तेज हो गयी. वो साइड मे एक पेड़ के पीछे छिप गयी और कार को निकलने दिया.
ये वही BMW थी और वो लड़के उसी को ढूँढ रहे थे. दौड़ते दौड़ते हलक सुख चुका था और सांस भी फूल रही थी. वो थोड़ी देर वही बैठ गयी और सांसो को कंट्रोल करने लगी.

2 मिनिट बाद वही BMW फिर वापस आई और तेज़ी से दूसरी दिशा मे निकल गयी. निशा खड़ी हुई और फिर दौड़ने लगी. वो 5 मिनिट ही दौड़ी होगी की फिर वही BMW की तेज लाइट्स उस पर पड़ी. निशा की सांस अटक गयी. अब उसके बचने की कोई उमीद नही थी.
वो ज़ोर ज़ोर से चिल्लाने लगी- बचाओ बचाओ...

पर किसी ने उसकी आवाज़ नही सुनी उस सुनसान मे. वो फिर दौड़ने लगी. वो बार बार कार से अपनी दूरी का अंदाज़ा लगा रही थी जो कि लगातार कम हो रही थी. लगभग 2-3 मिनिट तक दौड़ने के बाद वो अंधेरे मे किसी से जा टकराई. वाहा अंधेरे मे उसका चेहरा नही दिखाई दे रहा था. पर ये बबलू ना था.
निशा गिड़गिदते हुए बोली- प्लीज़ मुझे बचा लो भैया.

तभी BMW भी वाहा पहुच गयी. चारो एक साथ नीचे उतरे और उनके हाथो मे हॉकी, बेसबॉल बॅट आदि हथियार थे.

पहला- आए श्याने...छोड़ दे लौंडिया को... और फुट ले यहा से.
पाँचवा (जिससे निशा जाकर टकराई थी) –भोंसड़ी के अगर गंद मे दम हो तो आकर ले जा.
दूसरा- साले इसके साथ तेरी मा-बहन भी चोद देंगे.
पाँचवा- "गंद मे हमारी दम नही-हम किसी से कम नही." पहले इसको तो चोद लो कुत्तो.

यह सुन कर चारो और उत्तेजित हो गये और हथियारो के साथ अकेले खड़े पाँचवे पर टूट पड़े.

पर ये क्या...चारो अपनी टाँगो पर दौड़ कर आए थे पर उड़ते हुए वापस पहुच गये.

पाँचवा- क्यो क्या हुआ. चोदोगे नही इसको. आओ चोद लो. लंड है भी या लूंड हो.

उसकी ललकार सुनकर चारो ने हथियार फेंक दिए और ऐसे ही उसको पकड़ने के लिए भागे. पर ये पाँचवा तो वाकई मे उस्ताद था. एक एक कर के चारो की जबरदस्त धुनाई चालू हो गयी. आते जाओ पीटते जाओ. चारो के हर दाँव पर उस अकेले के दाँव भारी थे.

5 मिनिट बाद ही चारो सड़क पर पस्त पड़े थे. निशा अपने रखवाले के पैरो मे गिर पड़ी और रोने लगी- भैया आज आपने मुझे बचा लिया नही तो मैं क्या करती.

पाँचवा- जब मुझे भाई कह दिया तो तुझे डरने की कोई ज़रूरत नही है. ये लोग कौन थे और तू इनके साथ कैसे फँस गयी.

तभी उसे ध्यान आया कि निशा तो नंगी खड़ी थी. उसने तुरंत उसके हाथ खोले और अपनी शर्ट उतारकर निशा की ओर कर दी - लो पहले इसको पहन लो.

दोनो का ध्यान भटका तो चारो ने उसकी टाँगे पकड़ कर उसे नीचे गिरा लिया और उस पर टूट पड़े. निशा की तो चीख ही निकल गयी. वो मदद के लिए इधर उधर देखने लगी. चारो उस लड़के को बेरहमी से मारने लगे - साले आज दिखाते है कि हमारी गंद मे कितना दम है.

तभी एक जोरदार किक पाँचवे लड़के को पीट रहे एक लड़के के चेहरे पर पड़ी. उसकी बत्तीसी के सारे दाँत खून के साथ हवा मे उछल गये और वो ज़ोर से दिल दहलाने वाली चिंघाड़ के साथ सड़क पर लम-लेट हो गया.

ये देख कर बाकी तीनो नीचे लेटे पाँचवे को भूल गये और सामने देखने लगे. निशा भी चोंक गयी और उस नये मसीहा को देखने लगी. ये हमारा बबलू था. वो कुंगफु का एक्सपर्ट था. बबलू ने एक राउंड किक चलाई और तीनो के सिर टकरा गये और तारे नाचने लगे.

बबलू- विक्की...मेरे भाई तू यहा क्या कर रहा है...और ये लोग कौन हैं.
पाँचवा- ये चारो इस लड़की के पीछे पड़े थे. आअह...                    
बाबबलू- कौन लड़की...
विक्की- वो खड़ी है बेचारी...इन हरमजदो ने उसके कपड़े भी फाड़ दिए...मेरा तो खून खौल गया था..छोड़ूँगा नही इन हरमजदो को.

बबलू ने सिर घुमा कर देखा. निशा एक तरफ खड़ी सूबक रही थी. उसके शरीर पर केवल एक शर्ट थी जो बमुश्किल उसकी जाँघो तक पहुच रही थी. बबलू का भी खून खौल गया.

बबलू- हराम के पिल्लो. तुमने मेरे भाई समान दोस्त को चार चार ने मिलकर पीटा. मेरी जान की इज़्ज़त पर हाथ डाला. तुमको ऐसा सबक सिखाउन्गा की तुम्हारी मा रोएगी कि तुमको पैदा ही क्यो किया.

बबलू का पारा सातवे आसमान पर था. उसने इधर-उधर नज़र दौड़ाई तो उसे निशा के पैरो के पास पड़ी रस्सी दिखाई दी. उसने वो रस्सी उठाई और चारो को एक एक किक मारी. चारो दर्द के मारे दोहरे हो गये.

बबलू- अपनी-अपनी पॅंट उतारो.
पहला- प्लीज़ हमे छोड़ दो. हमे हमारे किए की सज़ा मिल गयी है.
बबलू- बहनचोद तेरे किए की सज़ा तो जितनी दम कम है. अब उतार इसे.

चारो दर्द के मारे बहाल थे. पॅंट उतरने के बाद चारो के अंडरवेर भी उतर गये. फिर बबलू ने वाहा पड़ी हॉकी भी उठा ली.

बबलू- कभी स्कूल गये हो ? मुर्गा बन जाओ. जिसकी गंद सबसे नीचे होगी उसमे ये हॉकी घुसा दूँगा और मरोडुँगा भी.

चारो तुरंत ही मुर्गा बन गये और अपनी गंद उपर पहुचने की होड़ करने लगे. चारो के टटटे और लंड सॉफ दिखाई दे रहे थे. बबलू ने रस्सी उठाई और चारो के टटटे रस्सी से बाँध दिए.

दर्द के मारे चारो उठने लगे तो बबलू ने चारो की गंद पर एक एक हॉकी जमा दी. चारो फिर नीचे झुक कर कराहने लगे.

बबलू- अब तुम दोनो लेट जाओ और बाकी दोनो इनके उपर 69 पोज़िशन मे लेट जाओ. चारो एक दूसरे का लंड चूसो. जिसका रस सबसे पहले निकलेगा और जो सबसे आख़िर मे दूसरे का रस निकलेगा, दोनो के टट्टो को मैं उखाड़ दूँगा. चलो अब शुरू हो जाओ.

चारो ने एक दूसरे के लंडो को चूसना शुरू कर दिया. चारो के दिल बुरी तरह बज रहे थे. जो हारेगा उसका पौरुष आज ख़तम होने वाला था. जल्दबाज़ी मे चारो ने एक दूसरे के लंडो को कई बार अपने दन्तो से छील दिया. पर वो रुके नही.

इधर बबलू ने निशा को अपनी बाँहो मे भर लिया- मुझे माफ़ कर दो निशा.
उसकी आँखो से आँसू बहने लगे थे. निशा की आँखो मे से भी आँसू बहने लगे. विक्की भी खड़ा हो गया था- भाई आज अंजाने मे मैने अपनी ही भाभी की इज़्ज़त को बचा लिया. भगवान तेरा लाख लाख शुक्रिया है.

इधर इनका सीन देख कर चारो धीमे हो गये थे. बबलू ने ज़ोर से चारो की रस्सिया खींच दी....आआआआआआययययययययययययईईईईईई
चारो एक स्वर मे चीख पड़े और स्पीड बढ़ा दी. पर टटटे जब बँधे थे तो रस कहा से निकलता.

बबलू- सालो तुम कुछ नही कर पाओगे. मुझे ही कुछ करना होगा. विक्की तू कार इधर ले आ.

विक्की BMW ले आया. बबलू ने उससे चाबी लेकर किनेटिक की चाबी उसे दे दी और निशा को उसके साथ बिठाकर आगे चलने को कहा. उनके जाने के बाद उसने चाबी मे लगे लाइटर से चारो के कपड़े जला दिए. फिर चारो रस्सियो के सिरे पकड़ कर कार मे ड्राइवर सीट पर आ गया. यह देख कर चारो के चेहरो पर ख़ौफ़ उतर आया. चारो बबलू के रहमोकरम पर थे.

बबलू- तुम चारो रस तो निकाल नही पाए. चलो आख़िरी मौका देता हू. चारो कार के साथ दौड़ोगे. जिसके टटटे बच गये सो बच गया. जिसके उखड़ गये सो उखड़ गये...

ये कह कर बबलू ने BMW को भगा लिया. अगले 1 मिनिट तक वो इलाक़ा उन चारो की चीखो से गूँजता रहा. एक एक कर के चारो रस्सिया ढीली हो गयी. 2 किमी बाद बबलू कार से उतरा और देखा पीछे कोई नही था. चारो रस्सी ज़मीन पर थी. रस्सी के दूसरे सिरो पर बँधे टट्टो का भी कुछ पता नही था. बबलू ने स्टेआरिंग व्हील को सॉफ किया और कार को वही छोड़ कर पैदल ही चल दिया.

क्रमशः.................................    आपकी प्यारी मोनू जोशी   बाकई ठीक हो तो मेरे को ईमेल करे